मैनें सीखा है
अनुज 'देवल' तिवारी
मैनें सीखा है इस जग से,
हर सूरज इक दिन बुझता है |
पर रात से अपनी लड़ाई लड़ के,
हर नई सुबह में उगता है |
मैनें सीखा है इस जग से,
हर रात का एक सवेरा है |
ये धरा जो पार कर जाओ,
उस पार देखो बसेरा है |
मैनें सीखा है इस जग से,
दुख-दर्द का भी मोल है |
अपनी सिसकी से जब पूँछा,
बोली हर आँसू अनमोल है |
मैनें सीखा है इस जग से,
हर दिन एक नई जंग है,
जीवन के संग गा के देखो,
हर पल कोई नया रंग है |
मैनें सीखा है इस जग से,
सपने भी सच होते हैं |
जीत उन्हीं की होती है,
जो अपने लक्ष्य में खोते हैं |
मैनें सीखा है इस जग से,
खुद को पहचान लेना मुश्किल है |
जीतने की ताकत सब में है,
जो जान जाओ तो मंज़िल है |
मैनें सीखा है इस जग से,
लोगों के रंग बदलते हैं |
इन्सानों की तो छोड़ो,
परछाईं के भी ढ़ंग बदलते हैं |